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मायावती: कांग्रेस जबरदस्ती यूपी में गठबंधन हेतु सात सीटें छोड़ने की भ्रान्ति ना फैलाए

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(Image Credits: Scroll.in)

कुछ महीनो पहले उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन का ऐलान किया गया। इन दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन होने के बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी में हलचल सी मच गई थी। जहां बीजेपी ने इस गठबंधन की मजबूती को लेकर काफी सवाल भी उठाये थे। वही दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने ऐसा नहीं किया। बल्कि अपना हित साधने के लिए अभी भी वह सपा बसपा गठबंधन के साथ होने का दिखावा कर रही है।

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दरअसल कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन से सम्बंधित सात सीटों पर उम्मीदवार न उतारने का निर्णय लिया है। ऐसा करके कांग्रेस पार्टी यह दिखाना चाहती है की वह अभी भी सपा बसपा गठबधन के साथ है। कांग्रेस द्वारा सात सीटों को छोडे जाने पर मायावाती और अखिलेश यादव ने पार्टी पर निशाना साधा है।

बहजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस जबरदस्ती यूपी में गठबंधन हेतु सात सीटें छोड़ने की भ्रान्ति न फैलाये, वह प्रदेश की पूरी अस्सी सीटों पर लडने के लिये स्वतंत्र है। इसके साथ साथ समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी और, कहा कि उनका गठबंधन भाजपा को हराने में सक्षम है, कांग्रेस किसी तरह का भ्रम न पैदा करे।

कांग्रेस से प्रियंका गाँधी वाड्रा ने मायावती और अखिलेश के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा की हम लोगो का मकसद केवल बीजेपी को हराना है। प्रियंका गांधी ने कहा, ‘हम किसी को परेशान नहीं करना चाहते, हमें किसी के साथ कोई दिक्कत नहीं है. हमारा मकसद भाजपा को हराना है, यही मकसद उन लोगों का है.’

दरअसल जनवरी महीने में मायावती और अखिलेश ने कांग्रेस को बाहर रखकर अपने गठबंधन का एलान किया था। इसके साथ उन्होंने राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी और सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से किसी कारणवश उम्मीदवार न उतारने का फैसला लिया। इसके बदले में कांग्रेस ने भी सात सीटों पर अपने उम्मीदवार न उतारने की घोषणा कर दी। कांग्रेस के इस कदम से यह संकेत गया था कि कांग्रेस अभी भी सपा-बसपा के साथ है।


बता दें की रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर ने प्रदेश की सात सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशियों के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का ऐलान किया था।

इसके साथ उन्होंने बताया कि कांग्रेस सपा-बसपा-रालोद के लिए सात सीटें छोड रही है इनमें मैनपुरी, कन्नौज और फिरोजाबाद शामिल हैं। इसके अलावा पार्टी उन सीटों पर किसी प्रत्याशी को नहीं उतारेगी, जिन पर बसपा सुप्रीमो मायावती, रालोद प्रमुख अजित सिंह और उनके बेटे जयंत के लड़ने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि गठबंधन ने रायबरेली और अमेठी सीटें कांग्रेस के लिए छोडी हैं। उसी क्रम में हम गठबंधन के लिए सात सीटें छोड रहे हैं।

इसको लेकर बसपा सुप्रीमो ने सोमवार को एक ट्वीट में कहा कि ”बीएसपी एक बार फिर स्पष्ट कर देना चाहती है कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में कांग्रेस पार्टी से हमारा किसी भी प्रकार का तालमेल या गठबंधन नहीं है. हमारे लोग कांग्रेस पार्टी द्वारा आये दिन फैलाये जा रहे भ्रम में कतई न आएं।

उन्होंने फिर अपने दूसरे ट्वीट में कहा कि ”कांग्रेस यूपी में भी पूरी तरह से स्वतंत्र है कि वह यहाँ की सभी 80 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करके अकेले चुनाव लड़े अर्थात हमारा यहां बना गठबंधन अकेले बीजेपी को पराजित करने में पूरी तरह से सक्षम है. कांग्रेस जबरदस्ती यूपी में गठबंधन हेतु सात सीटें छोड़ने की भ्रान्ति ना फैलाए।

मायावती के ट्वीट के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बसपा सुप्रीमो के सुर में सुर मिलाते हुये ट्वीट कर कहा कि” उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा और रालोद का गठबंधन भाजपा को हराने में सक्षम है. कांग्रेस पार्टी किसी तरह का कन्फयूजन न फैलाएं.

चुनाव करीब है और लगभग सभी पार्टियाँ ने इसको लेकर तैयारी कर ली है। वहीं कुछ पार्टियों इसको लेकर इतना भयभीत हो गई है की वह अपना हित साधने के लिए अन्य पार्टी के को समर्थन करने का दिखावा कर रही है। कांग्रेस पार्टी द्वारा सपा बसपा गठबधन के साथ ऐसा व्यवहार करना कुछ अजीब सा लगता है।

विपक्षी पार्टी कांग्रेस द्वारा ऐसा करने के पीछे एक कारण यह भी लगा रहा है की पार्टी चुनाव को लेकर कांग्रेस सपा बसपा गठबंधन से डरी हुई है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने कुछ ऐसे कदम भी उठाये हैं जिससे यह पता चलता है की पार्टी सपा बसपा के वोटों को अपने पाले में करना चाहती है।

कुछी दिनों पहले कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्र शेखर आजाद से मुलाकात की थी। उनकी इस मुलाकात से यह अटकले लगाई जा रही है की कांग्रेस भीम आर्मी प्रमुख को अपनी पार्टी में शामिल करना चाहती है। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस दलित समुदाय के वोटो को अपने साथ करने में सफल हो सकती है, जिससे सपा बसपा गठबंधन को भी थोड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

कांग्रेस अपने इरादों में सफल होती है यह नहीं वो तो चुनाव के परिणाम के बाद ही पता चल पाएगा। लेकिन अखिलेश यादव और मायावती के कांग्रेस को दिए गए जवाब से उनके गठबंधन की मजबूती का पता चलता है। इसके साथ सपा बसपा गठबंधन द्वारा ट्वीट करके कांग्रेस द्वारा सात सीटे छोड़ने पर दिए गए बयान से बीजेपी के खिलाफ उनके आत्मविश्वास का भी पता चलता है।

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