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मायावती का कांग्रेस को साथ, डगमगाती कमलनाथ सरकार को बचाया

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(Image Credits: The Hindu)

2019 लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी 30 मई यानि आज दूसरी बार प्रधानमंत्री की शपत लेने वाले है। दुबारा सत्ता में आने के बाद ही पार्टी ने मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार के सामने मुसबिते खड़ा करना शुरू कर दिया। दरअसल बीजेपी ने मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार को गिराने की कोशिश की थी। पार्टी ने कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को उनके बहुमत को लेकर चुनौती दी थी। जिसके बाद से कमलनाथ सरकार के सामने अपनी सत्ता को बचाने की मुसबित खड़ी हो गई।

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लेकिन अब कमलनाथ सरकार की सत्ता बचाने की मुसीबते ख़त्म होती नजर आ रही है। दरअसल मध्यप्रदेश में डगमगाती सरकार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपना सहारा दे दिया है, पार्टी ने बुधवार को राज्य सरकार को अपना बाहरी समर्थन जारी रखने की घोषणा कर दी है। वहीं बसपा के इस निर्णय से बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है। बसपा का यह कदम सराहनीय है वो भी ऐसे समय पर जब बीजेपी ने कमलनाथ सरकार को गिराने की ठान लिया था।

कांग्रेस को बाहरी समर्थन जारी रखने को लेकर बीएसपी उपाध्यक्ष रामजी गौतम ने कहा, “हमने सांप्रदायिक और जातिवादी ताकतों को रोकने के लिए कांग्रेस सरकार को अपना बाहरी समर्थन दिया है और प्रदेश में कांग्रेस सरकार को समर्थन जारी रखने के लिए बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर से निर्णय लिया गया है.”

उपाध्यक्ष रामजी गौतम ने बसपा विधायक के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बारे में भी स्पष्ट किया और कहा कि “हमारी पार्टी के सुप्रीमो का स्पष्ट रुख मध्यप्रदेश में सरकार को बाहर से समर्थन देना है। और सरकार में किसी मंत्री या अन्य पद को स्वीकार नहीं करना है। बहुजन समाज पार्टी द्वारा बीजेपी को रोकने के लिए बिना मंत्री पद लिए कांग्रेस पर बाहरी रूप से समर्थन जारी रखना काबीले तारीफ है।

पार्टी को समर्थन देने वालो में बसपा के दो विधायक, भिंड से संजू कुशवाह और पथरिया से रामबाई, एक सपा विधायक और चार निर्दलीय विधायक कमलनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का समर्थन करने वाले सात विधायकों में से हैं।


कांग्रेस को समर्थन करने वाले पथरिया से बसपा विधायक रामबाई ने अभी हाल ही में बीजेपी पर आरोप लगाया था की, उन्हें बीजेपी ने कमलनाथ की सरकार को गिराने के लिए 60 करोड़ रुपए की घूस देने की पेशकश की थी। इसके साथ साथ उन्हें बीजेपी द्वारा दो बड़े पदों को देने का भी प्रस्ताव रखा गया था। जिस पर उन्होंने कहा, “लेकिन मैं इस तरह के प्रस्तावों से प्रभावित नहीं होने जा रही हूं और दादा (कमलनाथ) के साथ खड़ी रहूंगी।

इस समय बहुजन समाज पार्टी का यह रुख इसलिए भी महत्पूर्ण हो जाता है। क्योंकि 30 अप्रैल को, बसपा प्रमुख मायावती ने प्रदेश में कांग्रेस सरकार को समर्थन देने पर पुनर्विचार करने के बारे में ट्वीट किया था। गौरतलब है की मायावती गुना से बीएसपी के लोकसभा उम्मीदवार लोकेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन करने से नाराज़ हुई थीं।

बसपा ने कांग्रेस को समर्थन देकर यह शाबित कर दिया है की वह मौजूदा सरकार के गलत रणनीतियों के खिलाफ है। बीजेपी का 2019 में एक बार फिर सत्ता में आने के तुरंत बाद ही विपक्षी पार्टी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराने की कोशिश करना गलत है। इसके साथ ही बीजेपी द्वारा बसपा विधायक को खरीदने की कोशिश करना उचित नहीं है। इससे पता चलता है की मौजूदा सरकार अपनी सत्ता और ताकत का इस्तेमाल करके विपक्षी पार्टियों को परेशान करना चाहती है।

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