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योगी के उत्तर प्रदेश में एक भी हिंसक घटना ना होने वाले दावे पर मायावती का बड़ा बयान

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(Image Credits: KalingaTV)

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के उस दावे को खारिज करते हुए इसे अर्द्धसत्य बताया कि प्रदेश में बीते दो साल में एक भी दंगा नहीं हुआ। आपको बता दे की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 3 जनवरी को ट्वीट करते हुए लिखा, “मार्च में मेरे शासनकाल के दो वर्ष पूरे होंगे. मेरे अब तक के शासन में कोई दंगा नहीं हुआ है.” अपने शासन की तारीफ करते हुए योगी आदित्यनाथ ने एक दूसरे ट्वीट में लिखा, “हमने संगठित किस्म के अपराध पर एक हद तक काबू पा लिया है. हमने कानून के राज को मजबूत बनाया है. पारिवारिक झगड़े या निजी दुश्मनी के कुछ मामलों को छोड़ दें, तो फिर पूरे प्रदेश में अब लोग सुरक्षित हैं.”

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन दावों पर बसपा सुप्रीमो ने एक बार फिर योगी सरकार को जमकर लताड़ा है मायावती ने गुरुवार को एक ट्वीट कर कहा, “भाजपा का दावा कि यूपी दो वर्षों में दंगा-मुक्त रहा, अर्द्धसत्य है। इस दौरान भाजपा के सभी महारथी मंत्री व नेतागण अपने ऊपर से जघन्य आपराधिक मुकदमे हटाने में ही ज्यादा व्यस्त रहे। मॉब लिंचिंग आदि को क्यों भूल गए, जिससे देश शर्मसार हुआ और अंतत: कोर्ट को दखल देना पड़ा।”

मायावती का यह बयान योगी आदित्यनाथ के उस बयान के दो दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने भाजपा सरकार में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को देश के लिए एक मॉडल बताया था, क्योंकि उनकी सरकार में दंगे की एक भी घटना नहीं हुई है। आदित्यनाथ ने बसपा और उसके गठबंधन के सहयोगी उत्तर प्रदेश की पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा था कि समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान लगातार दंगे हो रहे थे।

वही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ट्वीट कर योगी सरकार के ऊपर सवाल उठाये अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट में लिखा की ‘विकास’ पूछ रहा है… उत्तर प्रदेश के ठोकीदार से त्रस्त जनता के लिए राहत का कोई उपाय है क्या? प्रदेश की जनता को भाजपा सरकार के दो साल संकट के सौ साल लग रहे हैं. ‘

आपको बता दे की उत्तर प्रदेश में पिछले दो वर्षों में कोई बड़ी सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई है। लेकिन भीड़ हिंसा के मामले, जिनमें दक्षिणपंथी संगठनों के शामिल होने से पार्टियों के बीच राजनीतिक लड़ाई देखी गई। अगर विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आकड़ों की बात करें, तो योगी आदित्यनाथ के दावे सच्चाई से बहुत दूर नजर आते हैं. उत्तर प्रदेश में जहा योगी आदित्यनाथ प्रदेश में एक भी हिंसक घटना के ना होने की बात कह रही है उसकी सच्ची क्या है यह हम आपको बताते है।


योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के कुछ महीनों बाद ही मई 2017 में सहारनपुर में जातीय हिंसा हुई. इस हिंसा में एक व्यक्ति को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा वही कई लोग घायल हुए थे. जनवरी, 2018 में यूपी के कासगंज में सांप्रदायिक हिंसा हुई, जहां एक व्यक्ति की जान गई थी. बीते साल दिसंबर में पश्चिमी यूपी के बुलंदशहर में गोकशी के नाम पर हुई हिंसा में एक पुलिस अधिकारी समेत दो लोगों को भी इस घटना में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।

साल 2018 के खत्म होने से ठीक कुछ दिन पहले गाजीपुर में पीएम मोदी की रैली के बाद हिंसा हुई. इसमें एक पुलिस वाले की जान गई.वही जहा योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा की पारिवारिक झगड़े या निजी दुश्मनी के कुछ मामलों को छोड़ दें तो फिर पूरे प्रदेश में अब लोग सुरक्षित हैं। अगर हम इस बात पर नज़र डाले तो फैक्टचेकर डॉट इन की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुतबिक साल 2018 में 26 दिसंबर तक धार्मिक हिंसा के 93 मामले सामने आए हैं, जो पिछले एक दशक में हुए धार्मिक हिंसा में सबसे ज्यादा है. इनमें हिंसा के सबसे ज्यादा 27 मामले अकेल यूपी से हैं.

इसी साइट की एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक, जब से भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई है, तब से लेकर अब तक देशभर में गोहत्या से जुड़ी हिंसा के 69 परसेंट मामले अकले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए हैं.इसके अलावा गृह मंत्रालय की रिपोर्ट भी योगी आदित्यनाथ के दावे के गलत साबित करती है. फरवरी 2018 में संसद में पेश हुई इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में सांप्रदायिक हिंसा के सबसे ज्याद मामले उत्तर प्रदेश में हुए हैं.

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