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मायावती का चौकानें वाला फैसला, निकाले गए नेताओं के लिए खुलेंगे BSP के दरवाजे

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(image credits: New Indian Express)

लोकसभा चुनावों में बसपा और सपा को जिस नतीजे का इंतज़ार था वह नहीं मिलने पर बसपा और सपा ने अपने रास्ते अलग करने का मन बना लिया है। अब उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के रास्ते अलग हो गए हैं। बीएसपी सुप्रीमो मायावती लगातार पार्टी को मजबूत करने की कोशिश में लगी हैं। मायावती की ओर से लगतार बसपा को और अधिक मजबूत करने के लिए नए नए फैसले लिए जा रहे है। हाल ही में बसपा ने एक ऐसा फैसला लेने की बात कही है जिससे सभी चौके हुए है।

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आपको बता दे की अब बहुजन समाज पार्टी ऐसे नेता जिनको बीएसपी प्रमुख ने कभी पार्टी से निकाल दिया था, उनको दोबारा पार्टी में शामिल करने की बात चल रही है। साथ ही ऐसे नेताओं को पार्टी में जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। हालांकि बीएसपी प्रमुख मायावती का रुख अब भी उन नेताओं के प्रति बहुत सख्त है, जो खुद पार्टी छोड़कर चले गए और बाहर जाकर मीडिया में बीएसपी को लेकर उल्टी सीधी बयानबाजी की।

बीएसपी की रविवार को हुई राष्ट्रीय बैठक में इसको लेकर मंथन हुआ और बाद में तय हुआ कि ऐसे नेता जिनको मायावती ने पार्टी से निकाल दिया था उनको वापस दोबारा पार्टी में जोड़ा जा सकता है। बसपा की राष्ट्रीय बैठक में पार्टी को मजबूत करने को लेकर कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसमें विधानसभा के उपचुनावों में पार्टी किस तरह से तैयारियां करेगी उस पर मंथन किया गया।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में सवाल उठा कि पार्टी में पुराने नेताओं को जो पहले पार्टी छोड़ चुके हैं, क्या उन्हें दोबारा जोड़ा जा सकता है। पुराने दिग्गज नेताओ को दोबारा पार्टी में शामिल करने को लेकर बसपा सुप्रीमो का क्या बड़ा प्लान है यह अभी पूर्ण रूप से सामने नहीं आया है।

सूत्रों ने बताया कि इस पर मायावती की ओर से संकेत मिला कि जिन लोगों को पार्टी से किन्हीं कारणों से निकाला गया था लेकिन बाद में उनको गलती का अहसास हो गया है और वापस पार्टी में आना चाहते हैं, उनको दोबारा जोड़ा जा सकता है। हालांकि इस दौरान यह भी बात उठी कि जो लोग खुद पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टियों में गए और बाहर जाकर बीएसपी की बदनामी करवाई, उनको दोबारा न जोड़ा जाए।


सूत्र बताते हैं इस पर मायावती की सहमति रही। बीएसपी में पिछले कुछ सालों से कई बड़े नाम और पार्टी के छोटे बड़े नेताओं ने या तो खुद पार्टी छोड़ दी थी या उनको पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा था। पार्टी सिर्फ उन्ही नेताओ को वापस लेगी जिन्हे अपनी गलती का अहसास हो चूका है।

मायावती ने भाईचारा कमिटी के माध्यम से पार्टी को और मजबूत करने की योजना बनाई है। इसके लिए पार्टी के नेताओं को हर तबके और जाति धर्म के लोगों को संगठन से जोड़ने के लिए कहा है। पार्टी ने पश्चिम यूपी, मध्य यूपी, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध और तराई में जोनल कोआर्डिनेटरों को सभी लोगों को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। इस कमिटी को पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा और दानिश अली मॉनीटर करेंगे।

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