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प्रधानमंत्री मोदी को चुनाव आयोग ने एक बार फिर दिया क्लीन चिट

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(Image Credits: The Sentinel)

आचार सहिंता का उल्लंघन करने वाले मोदी और उनके नेताओ को चुनाव आयोग ने क्लीन चिट दे दी है। वही कांग्रेस को भी कई मामलो में चुनाव आयोग ने सिर्फ चेतावनी दे कर छोड़ दिया। हाल ही में खबर आयी थी की मोदी पर लगे आचार सहिंता के आरोपों को चुनाव आयोग ने बिना सोचे समझे माफ़ कर दिया। चुनाव आयोग का मानना है की मोदी ने आचार सहिंता का उल्लंघन नहीं किया।

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भाजपा सरकार के कई नेता ऐसे है जो खुलेआम भाषणों में धमकियां और आपत्ति जनक भाषा का प्रयोग कर रहे है परन्तु चुनाव आयोग उन्हें अनदेखा कर देता है या फिर चेतावनी दे कर छोड़ देता है। कई विपक्षी पार्टियां मोदी और चुनाव आयोग पर मिली भगत होने का आरोप लगा रहे है। विपक्षी नेताओं का कहना है की चुनाव आयोग भेदभाव तरीके से फैसला कर रहा है जिससे देश का सविंधान खतरे में है।

चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आचार संहिता उल्लंघन के एक ओर मामले में गुरुवार को क्लीन चिट दे दी। दरअसल, पीएम के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन को लेकर यह शिकायत कांग्रेस ने दी थी। आरोप था कि बीते महीने 21 तारीख को पीएम ने राजस्थान के बाड़मेर में एक जनसभा के दौरान चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन किया। आयोग ने इस पर पीएम को क्लीन चिट देते हुए कहा, किसी भी नियम का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री ने तब कहा था, “क्या परमाणु बम दिवाली के लिए हैं।” साफ़ तौर पर देखा गया है की मोदी आचार सहिंता का उलंघन कर रहे है परन्तु चुनाव आयोग ने कोई कार्यवाही नहीं की।

चुनाव आयोग ने इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी बड़ी राहत दी है। आयोग ने अमित शाह को हत्यारा कहने के मामले में राहुल को राहत दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि राहुल ने मध्य प्रदेश में एक चुनावी भाषण के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया। बता दें कि गांधी ने चुनावी भाषण में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ‘‘हत्या का आरोपी’’ बताया था।

चुनाव आयोग अधिकारियों ने गांधी को क्लीनचिट देते हुए कहा, ‘‘शिकायत की विस्तृत जांच की गई और जबलपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा भेजे गए भाषण की पूरी प्रतिलिपि की जांच के बाद, आयोग का विचार है कि आदर्श आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है। राहुल गांधी ने 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश के सिहोरा जिले में एक चुनावी रैली के दौरान यह कथित टिप्पणी की थी।


भाजपा अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था, ‘हत्या आरोपी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह। वाह, क्या शान है!’ भाजपा ने इस भाषण के बारे में चुनाव आयोग को शिकायत की थी। शाह ने इस टिप्पणी का कड़ा खंडन किया था और विपक्षी नेता के ‘कानूनी ज्ञान’ पर सवाल उठाये थे और कहा था कि इस ‘फर्जी’ आरोप को अदालत ने बहुत पहले ‘राजनीति से प्रेरित’ बताते हुए खारिज कर दिया था।

बीते महीने योगी आदित्यनाथ भी बैन लगाया गया था परन्तु एक बार फिर वह चुनाव आयोग के निशाने पर आ गए हैं। आयोग ने मुख्यमंत्री योगी को नोटिस जारी किया है। योगी आदित्यनाथ को उनके बाबर की औलाद वाले बयान पर नोटिस जारी किया गया है। यूपी के सीएम ने 19 अप्रैल को संभल में यह बयान दिया था। इसी पर आयोग ने उन्हें नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे में जवाब देने को कहा है।

एक तरफ मोदी है जिनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती परन्तु दूसरी और उन्ही के कुछ नेताओ को चुनाव आयोग की सजा भुगतनी पद रही है। इस मामले में अब कांग्रेस भी शामिल हो गयी है जिस पर चुनाव आयोग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा। चुनाव आयोग बड़े नेताओ के खिलाफ कोई कदम उठाने से क्यों डर रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी जैसे बड़े लोगो पर चुनाव आयोग नरमी बरत यह साबित करने की कोशिश कर रहा है की वह इनके साथ है।

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