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विश्वहिंदू परिषद के पूर्व नेता प्रवीण तोगड़िया मोदी के खिलाफ लड़ सकते है चुनाव

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(Image Credits: Firstpost Hindi)

लोकसभा चुनाव को लेकर राजनितिक पार्टियों द्वारा जोरो शोरो से तैयारियां चल रही है। सभी पार्टियां इस चुनाव में अपना पूरा जोर लगा देना चाहती है। एक तरफ चुनाव को लेकर कहीं गठबंधन किए जा रहे हैं। दूसरी और कुछ पार्टियों ने अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। वही कुछ पार्टियों के नेता भी अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। इसके साथ साथ कुछ पार्टिया चुनाव को देखते हुए पार्टी में नए चेहरे को भी शामिल कर रही है। खैर यह लोकतंत्र है, और पार्टियों को ऐसा करने का पूरा हक है इसमें कोई बुराई नहीं है।

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इस चुनाव में मौजूदा सरकार के प्रति उनके ही लोगो द्वारा नाराजगी दिखाई जा रही है। इससे हम यह भी कह सकते हैं की ये लोग पार्टी के उनके प्रति व्यवहार से खुश नहीं है। जिसके कारण कुछ लोग तो पार्टी छोड़कर दूसरे पार्टी में शामिल भी हुए है। इससे यह पता चलता है की मोदी सरकार ने देश की आम जनता के साथ साथ उनके पार्टी के लोगो को भी गुमराह किया है।

मौजूदा सरकार ने जनता से अनेको मुद्दों को लेकर वादों किये थे, और इन वादों में राम मंदिर भी एक अहम मुद्दा है। जिसे पूरा न करने पर देश के लोगो के साथ साथ उनके ही पार्टी व सरकार के करीबी रहे लोगो ने इसको लेकर सरकार की बड़ी आलोचना की थी। हम बात कर रहे है विश्व हिन्दू परिषद् ((वीएचपी) ) के पूर्व नेता प्रवीण तोगड़िया की जिन्होंने राम मंदिर का निर्माण न होने पर मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया था।

बात दें की विश्व हिंदू परिषद् के नेता प्रवीण तोगड़िया ((वीएचपी) से पहले ही अलग हो चुके है। इसके साथ अब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला ले लिया है। दरअसल शुक्रवार को (वीएचपी) के पूर्व नेता ने कहा कि उनकी नवगठित पार्टी हिंदुस्तान निर्माण दल (एचएनडी) देश भर में करीब 100 लोकसभा सीटों पर चुना लड़ेगी, जिनमें गुजरात की 15 सीटें भी शामिल हैं। तोगड़िया ने हाल में हिंदुस्तान निर्माण दल (एचएनडी) पार्टी बनायी है और अब पार्टी ने चुनाव के लिए अपने 41 उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि वह उत्तर प्रदेश में वाराणसी और अयोध्या या फिर मथुरा से आगामी चुनाव लड़ सकते हैं। वाराणसी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं और इस बार भी वह इसी सीट से चुनाव लड़ने वाले हैं। इसके साथ उन्होंने बताया की एचएनडी का मुख्य मुद्दा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कराना और कृषि उत्पाद के लिये बेहतर मूल्य तथा कृषि पर केंद्रित रोजगार पैदा करना है।


प्रवीण तोगड़िया ने इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी पर मंदिर न निर्माण करने पर निशाना साधा था। और कहा की सरकार ने राम मंदिर निर्माण को लेकर हिन्दुओं का विश्वास तोडा है। इसके साथ उन्होंने यह कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों और युवाओं के साथ भी छलावा किया है। जयपुर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान तोगडिया ने कहा, ”मोदी जी मंदिर नहीं बना सकते हैं तो इस्तीफा दे दें. हमें तो देश में राम, किसानों को फसलों का दाम और युवाओं को काम देने वाली सरकार चाहिए थी इसलिये लोगों ने वोट दिया था. देश को न तो राम मिले, न किसानों को दाम मिला और न ही युवाओं को काम मिला.”

हिंदुत्व की विचारधारा के समर्थकों माने जाने वाले तोगड़िया ने मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर चुप्पी है तो तीन तलाक पर बिल लाने की ऐसी क्या जल्दी थी। इसके साथ ही तोगड़िया ने दावा किया कि उनकी नई पार्टी एक हफ्ते में राम मंदिर निर्माण शुरू करवाने के लिए काम करेगी। इसके साथ ही उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की भी बात कही।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आज कहा कि देश में नई शिक्षा नीति तैयार है। आरएसएस सरकार से शिक्षा नीति तैयार करवा सकती है तो साढ़े चार वर्षों में आरएसएस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से राम मंदिर कानून क्यों नहीं बनवाया। उन्होंने आगे कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साढ़े चार वर्षो के शासन में 52 हजार किसानों ने अपने जीवन को अंत कर लिया। और इसके साथ उनके कार्यकाल में किसान 12 लाख करोड़ के कर्ज में भी डूबे हुए है। इसे दूर क्यों नहीं किया गया। तोगड़िया ने कहा केन्द्र में बहुमत की सरकार होने बावजूद किये गये वादों को पूरा नहीं करने के लिए भाजपा को देश से माफी मांगनी चाहिए।

प्रवीण तोगड़िया द्वारा मौजूदा सरकार पर रोजगार और किसानों जैसे मुद्दों को लेकर सवाल पूछना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने पहले भी सरकार पर युवाओं के रोजगार और मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर निशाना साधा है। वो अक्सर सरकार से मंदिर को लेकर किये गए झूठे वादों पर सवाल जवाब करते आये हैं। और हर बार उन्होंने इसको लेकर सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है।

कभी नरेंद्र मोदी के साथ एक स्कूटर पर संघ की शाखा में जाने वाले प्रवीण तोगड़िया ने चुनाव का ऐलान करके आज उन्हें ही चुनौती दे दिया है। यह माना जाता है की दोनों के बीच रिश्तों में दरार मोदी के गुजरात में मुख्यमंत्री बनते ही दिखने लगी थी। 2002 में मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि तोगड़िया सरकार के कामकाज विशेषकर गृह विभाग के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इसी के बाद दोनों के संबंधों में कड़वाहट शुरू हो गई।

देखा जाये तो पूर्व वीएचपी नेता द्वारा मौजूदा सरकार पर आरोप लगाना उचित ही है। क्यंकि सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में जनता को गुमराह करने के आलावा कुछ भी नहीं किया है। अपने कार्यकाल में सरकार अपने किए गए वादों को सिर्फ टालती ही आई है। मौजूदा सरकार के इस प्रकार के रवैये से जनता तो परेशान हो ही गई है, वहीं दूसरी औऱ उनके ही पार्टी के नेता और किसी समय में उनके करीबी माने जाने लोगो ने भी सरकार से नाराजगी जताते हुए बड़ा कदम उठाने का फैसला ले लिया है।

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