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बंगाल बीजेपी में मुस्लिम तृणमूल नेता का विरोध, पार्टी में लाने के खिलाफ पास किया गया प्रस्ताव

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(image credits: hindustan times)

पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेताओं द्वारा पार्टी में शामिल किये गए नए चेहरे को लेकर विरोध रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। बंगाल में बीजेपी के 18 सीट आने के बाद,भाजपा तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी में शामिल होने के लिए प्रभावित कर रही है। एक तरफ कुछ नेताओं द्वारा इसका साथ दिया जा रहा है , वहीं दूसरी और कुछ नेता इसको लेकर बगावत पर उतर गए है। हाल ही में बीजेपी के मुकुल रॉय के नेतृत्व में बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं को पार्टी में शामिल किया, इन नेताओं में मोनिरुल इस्लाम का भी नाम शामिल है।

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वहीं अब मोनिरुल इस्लाम को बीजेपी में शामिल किए जाने के खिलाफ पश्चिम बंगाल की जिला ईकाई के नेताओं ने बगावत कर दी है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी की बीरभूम ईकाई ने इस्लाम को पार्टी में स्वीकार करने से इनकार करते हुए एक प्रस्ताव पास किया है। नेताओं ने आरोप लगाया है की लोकसभा चुनाव से पहले मोनरूल इस्लाम ने बीजेपी समर्थको के साथ बुरा व्यवहार किया था।

आपको बता दें कि इस्लाम 29 मई को दिल्ली में कैलाश विजयवर्गीय और मुकुल रॉय की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए थे। वह तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर 2016 में लाभपुर से निर्वाचित हुए हैं।

टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, बीरभूम के बीजेपी चीफ रामकृष्ण रॉय ने सोमवार को कहा,‘मनीरुल के बीजेपी में शामिल होने के बाद बीते हफ्ते हुई एक बैठक में हम एक प्रस्ताव लाए। हम उन्हें बीजेपी के सदस्य के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे।’ उन्होंने आगे कहा, पार्टी सहकर्मी के तौर पर मोनिरुल के साथ काम करना असंभव है क्योंकि लोकसभा चुनावों से पहले उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बुरा बर्ताव किया था। इसके साथ साथ उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को रैलियों में भी शामिल नहीं होने दिया। और इस घटना को हम अभी भूले नहीं हैँ। हमने अपने फैसले की जानकारी प्रदेश बीजेपी आलकमान को दे दी है।

पूर्व तृणमूल कांग्रेस के नेता मोनिरुल इस्लाम का बीजेपी में शामिल होने के बाद से ही कई बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओ ने तीखा विरोध जताया था। कुछ लोगो ने तो सोशल मीडिया पर इसकी निंदा करते हुए उन्हें तुरंत ही बीजेपी से बाहर करने की मांग भी की। इसी बारे में एक सीनियर बीजेपी नेता ने कहा, पार्टी सहकर्मी के तौर पर मनीरुल के साथ काम करना असंभव है क्योंकि लोकसभा चुनावों से पहले वह बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ गलत तरीके से पेश आये थे। उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को रैलियों में शामिल नहीं होने दिया। हमारे दिलोदिमाग पर उस वक्त के यादे अभी भी ताजा हैं।


वहीँ बीरभूम के कुछ बीजेपी नेताओं ने मोनिरुल इस्लाम की इस्तीफे की मांग करी है। जब इस बारे में पूर्व तृणमूल कांग्रेस के नेता मोनिरुल इस्लाम से पुछा गया तो उन्होंने कुछ इस प्रकार कहा, ‘अब मैं बीजेपी का हिस्सा हूं और आगे भी ऐसा रहेगा।’ बीजेपी से अपने इस्तीफे की मांग को इस्लाम ने अनुब्रत मंडल जैसे तृणमूल नेताओं की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा, ‘इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता।’

उधर बंगाल भाजपा अध्यक्ष और मिदनापुर से सांसद दिलीप घोष ने कहा , पार्टी का सिर्फ झंडा लहराने भर से कोई संगठन का सदस्य नहीं बन जाता। दिलीप घोष ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि उन्होंने बीजेपी कैसे जॉइन की। हमारी पार्टी में मनीरुल की भूमिका को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।’ हालाँकि उन्होंने मोनिरुल इस्लाम के खिलाफ किसी प्रस्ताव के पास होने की जानकारी को इंकार कर दिया है।

आखिर क्यों बीजेपी के कुछ नेताओं द्वारा मोनिरुल इस्लाम के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है। क्या बीजेपी नेताओं द्वारा मोनिरुल के साथ इस प्रकार का बर्ताव इसलिए किया जा रहा है। क्यूंकि वह किसी खास धर्म से ताल्लुक रखते हैं, या कुछ और। हम नहीं जानते की मोनिरुल इस्लाम ने चुनाव प्रचार दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया है। लेकिन अब बीजेपी नेताओं को यह समझना चाहिए की मोनिरुल इस्लाम अब बीजेपी का हिस्सा है, और उनके साथ इस तरह से पेश आना सही नहीं लगता है।

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