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राजस्थान : बीजेपी को लगा बड़ा झटका, पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह कांग्रेस में शामिल होने को तैयार

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(Image Credits: NewsState)

आगामी 2018 का विधानसभा चुनाव लगभग सर पर ही है। इसी बीच कुछ पार्टी के नेताओं के एक पार्टी छोड़कर दूसरे पार्टियों में जाने की खबर आने लगी है। ऐसे ही बीजेपी के एक नेता मानवेन्द्र सिंह जसवंत सिंह के बेटे कांग्रेस में शामिल होने जा रहें है। जसवंत सिंह बाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं।

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जसवंत सिंह के बेटे और बीजेपी विधायक मानवेन्द्र सिंह ने कुछ दिनों पहले ही बीजेपी से अपना सम्बन्ध तोड़ लिया है। मानवेन्द्र सिंह ने राजस्थान की वसुंधरा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उनका कहना है की 2014 में बाड़मेर चर्चा का विषय था, और कहा की सभी पार्टियाँ इस विधानसभा चुनाव में भी बाड़मेर की चर्चा करती दिख रही है।

किस कारण बीजेपी से बागी हुए मानवेंद्र

बाड़मेर के विधायक वसुंधरा राजे की बाड़मेर और पचपदरा में गौरव यात्रा से नदारद रहे थे। बात इतनी ही नहीं थी मानवेन्द्र सिंह ने इसके लिए अपनी स्वाभिमानी रैली भी बुलाई थी। पिछले चुनाव में वसुंधरा की वजह से उनके पिता जसवंत सिंह को टिकट नहीं मिला था। तब वो निर्दलीय चुनाव लड़े परन्तु हार गए थे। इसी कारण से मानवेंद्र सिंह पार्टी से नाराज हैं।

मानवेंद्र सिंह की राजपूत वोटों पर अच्छी पकड़ है, ऐसे में वो बीजेपी के लिए मुसीबत बन सकते हैं। मानवेंद्र सिंह राजपूत समुदाय से आते हैं। राजपूत समुदाय का राजस्थान में अच्छा खासा वोट बैंक है। जिसके कारण राजपूत राजस्थान में कई सीटों पर बड़ा असर दिखा सकते हैं और हार जीत का फैसला कर सकते हैं।


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के उपरान्त मानवेंद्र सिंह ने एक न्यूज़ चैनल के लिए ब्लॉग लिखा था। उस ब्लॉग में उन्होनें अपने पिता और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनके सम्बन्ध का जिक्र किया था। मानवेंद्र सिंह ने बताया की वाजपेयी जी उनके पिता को ‘हनुमान’ कहते थें, क्योंकि वाजपेयी द्वारा चलाई जा रही गठबंधन की सरकार में वो हमेशा ‘संकटमोचक’ का काम करते थे।

मानवेंद्र ने यह भी बताया कि जब उनके पिता भाजपा से निलंबित हुए थे तो अटल जी को इस बात का बड़ा दुख हुआ था। कुछ वर्ष पहले जसवंत सिंह को ब्रेन हेमरेज हो गया था जिसके कारण वो अभी सार्वजानिक जीवन से दूर है।

बीजेपी ने 2013 में विधानसभा चुनाव में 162 सीटों पर जीत हासिल कर इतिहास रच दिया था। जबकि कांग्रेस 200 सीटों वाली विधानसभा में सिर्फ 21 सीटें ही ला पाई थी। लेकिन इससे पूर्व 1998 में कांग्रेस ने 153 सीटों पर जीत हासिल करके बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया था। वहीं कांग्रेस ने दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन 1977 में किया था जब पार्टी केवल 41 सीटें ही हासिल का पाई थी।

 

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