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साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने पर बीजेपी के सहयोगी दल के मंत्री रामदास अठावले हुए नाराज

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(Image Credits: DNA India)

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बीजेपी द्वारा मध्य प्रदेश से चुनावी मैदान में उतारने पर विपक्षी पार्टी ने ऐतराज जताया था। विपक्षी पार्टियों ने साध्वी पर मालेगांव घटना में शामिल होने के कारण उनके चुनाव लड़ने को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा था। एक तरफ जहाँ साध्वी प्रज्ञा को लेकर विपक्षी पार्टिया ने बीजेपी पर सवाल उठाये थे वहीं अब दूसरी ओर उनके ही पार्टी से जुड़े लोग साध्वी प्रज्ञा के चुनाव लड़ने पर ऐतराज जता रहे हैं।

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हम बात करने जा रहे है मौजूदा सरकार में मंत्री और बीजेपी के सहयोगी दल RPI (रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया) के प्रमुख रामदास अठावले की। उन्होंने बीजेपी की तरफ से साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने पर नाराजगी जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि वो प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से BJP प्रत्याशी बनाने के BJP के निर्णय से सहमत नही हैं।

दरअसल भोपाल पहुंचकर RPI प्रमुख रामदास अठावले ने कहा कि मालेगांव घटना में प्रज्ञा ठाकुर का नाम आया था। जिसको लेकर हेमंत करकरे के पास काफी सबूत थे, जिसका मामला चल रहा है। परन्तु जिस प्रकार साध्वी प्रज्ञा ने शहीद को लेकर श्राप देने जैसा बयान दिया वो सही नहीं है। BJP को प्रज्ञा ठाकुर को पार्टी का टिकट नहीं देना था।

उन्होंने प्रज्ञा पर आरोप लगाया कि उन्होंने शहीद हेमंत करकरे का अपमान किया है। साध्वी को टिकट देने की आवश्यकता नहीं थी। हम इससे सहमत नहीं हैं. साध्वी की भाषा से बीजेपी को नुकसान होगा। बीजेपी को उनपर कंट्रोल करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि टिकट देने ना देने का मामला बीजेपी का है।

इसके साथ साथ रामदास अठावले ने आरक्षण के मुद्दे पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि NDA की सरकार आने पर प्रमोशन में आरक्षण को लेकर नया कानून बनाने पर विचार करेंगे। ऐसा करने से जनरल कैटेगरी के साथ अन्याय नही होनेवाला है। 50% प्रमोशन जनरल कैटेगरी से होते है। बाकी 50% प्रमोशन SC, ST, OBC से होते हैं। इसलिए यह अन्याय नहीं है।


साध्वी प्रज्ञा को टिकट दिए जाने पर रामदास अठावले द्वारा अपने सहयोगी बीजेपी से नारजगी जाहिर करने से पता चलता है की उन्हें मौजूदा सरकार का यह रवैया पसंद नहीं है। इसके साथ साथ उन्हें यह भी पता है की साध्वी प्रज्ञा को चुनाव में उतारने से उनके सहयोगी बीजेपी को कितना नुकसान उठाना पड सकता है। सहयोगी पार्टी रिपब्लिकन ऑफ इन्डिया के प्रमुख द्वारा बीजेपी का इस मामले में विरोध करने से पता चलता है की वह पार्टी के निर्णय से नाखुश हैं।

बता दें क‍ि भोपाल लोकसभा सीट पर 12 मई को चुनाव होना है। इसके ल‍िए 16 अप्रैल को नॉम‍िनेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 23 अप्रैल नॉम‍िनेशन की अंत‍िम तारीख थी और 24 तारीख को स्‍क्रूटनी किया गया। 12 मई को छठवें चरण में मध्‍य प्रदेश की 8 सीटों पर चुनाव होना है, ज‍िसमें से भोपाल भी है।

रामदास अठावले ने अपने सहयोगी पार्टी द्वारा साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने पर नारजगी तो जाहिर की है, इसके साथ साथ उन्होंने बीजेपी को उनके बयान पर नियंत्रण करने की सलाह भी दी है। रामदास अठावले द्वारा इस प्रकार का बयान देने से पता चलता है की उनकी सहयोगी पार्टी के साथ तालमेल ठीक नहीं है।

भोपाल से बीजेपी की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा विवादित बयान देना नया नहीं है। कभी वह विपक्षी पार्टी के नेताओ के बारे तो कभी उन्होंने शहीदों के बारे में विवादित बयान दिया है। ऐसे ही एक बार उन्होंने विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह आतकंवाद बता दिया था। उनके इस बयान को लेकर चुनाव आयोग ने भी उनसे ऐतराज जताया था।

उन्होंने यह बयान तब दिया था जब वह भोपाल में सिरोही में चुनाव प्रचार का उद्धघाटन कर रही थी। उस दौरान प्रज्ञा ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने फैक्टरियां बंद कराईं। ‘राज्य में 16 साल पहले उमा दीदी ने उन्हें हराया और 16 साल बाद भी वह मुंह नहीं उठा पाया, और इसके बाद राजनीति करने की कोशिश भी नहीं की। प्रज्ञा ने आगे कहा एक बार फिर ऐसे आतंकी का समापन करने के लिए संन्यासी को खड़ा होना पड़ा है।

बीजेपी में अपने सहयोगी द्वारा या पार्टी के अंदर से ही किसी विशेष प्रत्याशी को टिकट देने पर या काटे जाने पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे ही पार्टी द्वारा गौतम गंभीर को टिकट देने पर पार्टी के कुछ नेताओं ने नाराजगी जाहिर की थी। दूसरी और पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुमित्रा महाजन को इस बार टिकट न देने पर सरकार के प्रति हैरानी जाहिर किया था।

इन सभी बातो से पता चलता है की पार्टी इस चुनाव में भी हिंदुत्व को मुद्दा बनाने वाली है। और जो प्रत्याशी इस मुद्दे पर सटीक लगता है उन्हें ही टिकट देने की कोशिश चल रही है। और जहाँ पार्टी में निर्णय लेने की बात आती है तो यह अधिकार सिर्फ गिने चुने लोगो को ही दिया गया है।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे व्यक्ति को बीजेपी द्वारा उम्मीदवार बनाने से पता चलता है की, पार्टी चुनाव जीतने के लिए किसी भी पृष्टभूमि वाले व्यक्ति को टिकट देने से पीछे नहीं हटेगी।

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