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आयोग के बड़े अधिकारियों, कलेक्टर, रिटर्निंग ऑफिसर और वकीलों की साजिश में फसे तेज़ बहादुर

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(Image Credits: khabarindiatv)

लोकसभा चुनाव 2019 के आख्रिरी चरण के मतदान 19 मई को होने है जिसके बाद 23 मई को परिणामो की घोषणा करी जाएगी, आखिरी चरण के मतदान में कई राज्यों में चुनाव होने है वही उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी 19 मई को चुनाव होंगे। इस बार वाराणसी के चुनाव पर सबकी नज़र बनी हुई है क्यूंकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी है और हाल ही में वहां से चुनाव लड़ने का फैसला लेने वाले भूतपूर्व सैनिक तेज़ बहादुर यादव ने भी मोदी के खिलाफ नामांकन दर्ज करवाई थी।

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हालाँकि तेज़ बहादुर यादव को लेकर चुनाव आयोग और मोदी सरकार की बड़ी साजिश के बाद उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था। तेज़ बहादुर यादव के नामांकन रद्द होने को लेकर लगातार साजिशे रची जा रही थी और वही अब साफ़ तौर पर सामने आ गया है की तेज़ बहादुर का नामांकन रद्द करना एक बड़ी और सोची समझी साजिश थी एक स्टिंग ऑपरेशन में छिपे हुए कैमरे पर चुनाव आयोग (ईसी) के पर्यवेक्षक ने यह साफ तौर पर कबूला कि लगभग 48 घंटों तक वह यादव का पर्चा खारिज करने के लिए वजह ढूंढते रह गए थे।

हालांकि, इससे पहले यादव के वकील ने भी दावा किया था कि पर्यवेक्षक ने बनारस के जिलाधिकारी से उनके सामने कहा था कि बर्खास्त बीएसएफ जवान का पर्चा खारिज किया जाना है। बता दें कि पीएम के खिलाफ चुनाव में खड़े होने वाले यादव का नामांकन खारिज होने के बाद उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें जानबूझकर चुनाव लड़ने नहीं दिया जा रहा है और अब तेज़ बहादुर का यह दावा सच साबित हो गया है।

उनके वकील राजेश गुप्ता ने दावा किया था, “वाराणसी चुनाव क्षेत्र के जो रिटर्निंग ऑफिसर जिला अधिकारी सुरेंद्र सिंह हैं, उन्होंने बताया था कि पेपर में कोई गलती नहीं है, तभी आंध्र के बड़े अधिकारी आए और डीएम से बोले कि तेज बहादुर की फाइल कहां है…डीएम से उन्होंने कहा कि इनका तो रिजेक्ट करना है।” न्यूज़ चैनलों की पड़ताल के बाद ईसी के पर्यवेक्षक प्रवीण कुमार ने साफ तौर माना कि उन्हें तेज बहादुर यादव का पर्चा खारिज करने की वजह ढूंढने में लगभग 48 घंटे का समय लगा था।

छिपे हुए कैमरे के सामने रिपोर्टर से कुमार ने कहा की, हमारे पास 48 घंटे है जिसमे पहले नॉमिनेशन और दूसरे नॉमिनेशन के बीच हुए गैप में हमने सब नियम देख लिए थे। इतना निगलेक्ट तो कुछ भी नहीं…मैंने कलेक्टर और रिटर्निंग ऑफिसर, वकील और चुनाव आयोग सभी से फ़ोन पर बार कर ली है और सबको इसकी जानकारी दे दी है । धारा 33/3 के तहत यह सभी किया गया है।


स्टिंग ओपरेशन के दौरान चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक.प्रवीण कुमार द्वारा यह बात सामने आई की सभी की मिली जुली साजिश के तहत तेज़ बहादुर का नामांकन रद्द कर दिया गया चुनाव आयोग के बड़े अधिकारी, कलेक्टर, रिटर्निंग ऑफिसर और वकील सभी की सोची समझी साजिश के तहत उनका नामांकन रद्द कर दिया गया ताकि मोदी के वोटो पर कोई असर न पड़े।

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