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शिवसेना ने मोदी सरकार से किये सवाल – आरक्षण तो दे दिया परन्तु नौकरियां कहाँ है ?

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(Image Credits: ABP news)

आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग में शामिल लोगो को 10 प्रतिशत आरक्षण देने को संसद से मंजूरी मिल गयी। परन्तु उसके एक दिन बाद शिवसेना ने गुरूवार को आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा की नौकरियां कहा से आएँगी ? साथ ही पार्टी ने चेतावनी दी और कहा की अगर यह एक चुनावी चाल है तो महंगा साबित हो सकता है।

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शिवसेना का कहना है की मराठा समुदाय को भी महाराष्ट्र में आरक्षण दिया गया है लेकिन सवाल अभी भी यही बना हुआ है की नौकरियां कहां है? संसद ने बुधवार को सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत तक आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दी है।

शिवसेना ने अपने मुख्य पत्र सामना के एक सम्पादकीय से बातचीत के दौरान कहा ” जब सत्ता में बैठे लोग रोजगार और गरीबी दोनों मोर्चो पर विफल होते है तब वे आरक्षण का कार्ड गेम खेलते है। शिवसेना ने यह भी कहा अगर यह वोट के लिए लिया गया निर्णय है तो यह चुनाव में महंगा साबित होगा।

10 प्रतिशत आरक्षण के बाद रोजगार का क्या होगा ? आपको नौकरी कहा से मिलेगी ? ” शिवसेना का कहना है की भारत में 15 साल से अधिक लोगो की आबादी हर महीने 13 लाख बढ़ रही है।  18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों को नौकरी देना अपराध है लेकिन बाल श्रम अभी भी जारी है।

उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी केंद्र और महाराष्ट्र दोनों जगह सत्तारूढ़ भाजपा की गठबंधन सहयोगी है। ‘सामना’ के मुताबिक यह कहा गया है की देश में रोजगार की दर को संतुलित बनाये रखने के लिए हर साल 80 से 90 लाख नए रोजगार की जरूरत है लेकिन यह हिसाब कुछ समय से असंतुलित है।


सामना का अपने मराठी संस्करण में कहना है की पिछले दो सालो में नौकरी के अवसर बढ़ने के बजाय कम हुए है और नोटबंदी एवं जीएसटी होने के कारण करीब 1.5 करोड़ से लेकर दो करोड़ नौकरियां गयी है। युवाओं में लाचारी की भावना है।

शिवसेना का दावा है की 2018 में रेलवे में 90 लाख नौकरियो के लिए 2.8 करोड़ लोगो ने आवेदन किया। इसके आलावा मुम्बई पुलिस में 1,137 पदों के लिए चार लाख से अधिक लोगो ने आवेदन किया और कई आवेदनकर्ता शैक्षिणिक योग्यता रखते थे। “इसमें मज़ाक करते हुए यह कहा गया सरकार के 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद क्या योग्य युवा कुछ हासिल कर पाएंगे ? मोदी पर तंज कसते हुए कहा , युवाओं को पकौड़ा तलने की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री को आखिरकार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देना पड़ा। “

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