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LJP के नेता का अब तक का सबसे बड़ा बयान, कहा दलित आरक्षण छोड़े

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(image credits: Scroll.in)

लोगो के लिए आरक्षण एक बड़ा मुद्दा रही है। आरक्षण पाने के खातिर लोगो ने सडको पर उतर कर आंदोलन किये। इसके बाद सरकार को आरक्षण बढ़ाना पड़ा। परन्तु ऐसे ही मामलो में कई समुदाय के लोगो ने आरक्षण की मांग शुरू कर दी थी जिस पर सरकार ने अपनी मंजूरी नहीं दी थी। आरक्षण को लेकर सरकार भी कई हद तक लोगो के साथ शामिल रही। लोगो को लुभाने और वोट हासिल करने के लिए विपक्षी पार्टियों ने लोगो का साथ दिया।

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इन सबके कारण ही आज आरक्षण एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। नौकरी से लेकर पढाई और अन्य चीज़ो में आरक्षण को बढ़ाना सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। परन्तु आरक्षण बढ़ाने के बाद सरकार की मुसीबते भी बढती रही। कई और समुदाय जैसे दलितो ने भी ज्यादा आरक्षण की मांग की थी।

वही आरक्षण का मामला फिर से गर्माता जा रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी यानी एलजेपी के नेता चिराग पासवान ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। चिराग पासवान ने कहा कि संपन्न दलितों को आरक्षण छोड़ देना चाहिए।उन्होंने अपनी बात के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि जिस तरह सभी लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी, उसी तरह संपन्न दलितों को भी आरक्षण का त्याग कर देना चाहिए। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए बयान में चिराग ने कहा कि इससे दलित समुदाय के बाकी लोगों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।

रामबिलास पासवान के पुत्र चिराग ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो जिन्हें आरक्षण की सही मायनों में जरूरत है उन्हें अधिक से अधिक मदद मिल पाएगी। हालांकि चिराग ने कहा ऐसा कानून बनाकर नहीं किया जा सकता बल्कि लोगों को जागरूक करना चाहिए ताकि वे स्वेच्छा से फैसला ले सकें।

चिराग ने कहा कि मैं जातिरहित समाज की आशा करता हूं और यह मेरा लक्ष्य भी है। उन्होंने कहा कि मैं बिहार से आता हूं जहां जातिगत समीकरण हावी रहते हैं और इस दिशा में बिहार और उत्तर प्रदेश बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती पर निशाना साधते हुए पासवान ने कहा कि वे चाहतीं तो इस दिशा में बहुत कुछ कर सकती थीं, लेकिन उनका ध्यान मूर्तियां बनाने पर ज्यादा था।


चिराग पासवान के मुताबिक दलितों के आरक्षण छोड़ने पर उन्हें ज्यादा फायदा होगा। परन्तु यह कैसे मुमकिन है, आरक्षण के बिना दलितों को किसी भी क्षेत्र में काम करने और अन्य क्षेत्रों में समस्या का सामना करना पड़ सकता है। आखिर दलितों पर ही आरक्षण को लेकर इस प्रकार का बयान क्यों दिया गया।

जाति के आधार पर लोगो से उनका हक़ छीन लेना यह दर्शाता है की आपका नजरिया कैसा है। किसी ऊँची जाति को लेकर इस प्रकार का बयान सामने नहीं आया परन्तु दलितों पर आरक्षण को लेकर इस प्रकार से निशाना साधा गया है की मानो उनकी भलाई के लिए ही बोलै गया हो।

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