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उत्तर प्रदेश- लोकसभा चुनाव में बराबर-बराबर सीटों पर लड़ सकते हैं सपा, बसपा और कांग्रेस!

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पाँच राज्यों में चुनाव ने नतीजे आने के बाद राजनीति में एक नया घमासान मचा हुआ है। सत्ता का सेमीफइनल कहे जाने वाले पांच राज्यों में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी की लहर कम होती नज़र आ रही है। वही अब विपक्ष भी लोकसभा चुनाव एकजुट होता नज़र आ रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को रोकने के लिए विपक्षी गठबंधन को लेकर जो असमंजस की स्थिति थी वह खत्म हो चुकी है।

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महागठबंधन को लेकर हो सकती है बड़ी बैठक

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सत्ता में आने से दिसम्बर के आखिरी सप्ताह या जनवरी में विपक्ष दलों के नेता महागठबंधन को लेकर एक बड़ी बैठक करने वाले है। बैठक के दौरान महागठबंधन को लेकर सभी रणनीतियों और किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न पैदा हो इस सब बातो पर बैठक कर सकते है। ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश में होने वाले गठबंधन में भी देखने को मिलेगा।

कांग्रेस पिछले चुनाव परिणामो के मुकालबे अब काफी मजबूत दिखाई पड़ती नज़र आ रही है वही पहले जहा सपा और बसपा कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं थी, वहीं परिस्थितियां यकायक बदल गई हैं। पांच राज्यों के चुनाव के दौरान कांग्रेस की बढ़त को देख सपा और बसपा दोनों यह मान कर चल रही है की आने वाले समय में कांग्रेस अपने दावेदारी मजबूत कर सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन में कांग्रेस की दावेदारी मजबूत ही नहीं होगी बल्कि सीटों की हिस्सेदारी भी बराबर-बराबर की होगी, इसके संकेत यूपी कांग्रेस ने भी दिए। यूपी कांग्रेस के मीडिया हेड राजीव बख्शी ने कहा कि उनकी पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी है और यहां कोई भी फैसला कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और आलाकमान की राय से होता है।

उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ सकती है कांग्रेस

यूपी कांग्रेस ने यह भी साफ कर दिया है की उत्तर प्रदेश मे वह सपा और बसपा को गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं, पर प्रदेश में सीटों का बटवारा किस आधार पर तय किया जायेगा यह कांग्रेस पार्टी तय करेगी और सीटों के बटवारे को लेकर किसी भी दवाब सहन नहीं किया जायेगा।


कांग्रेस यह अपने बयान से यह भी किया है की मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़ और राजस्थान में जिस तरह अल्पसंख्यक, दलित और सवर्णों का साथ मिला है उससे वह यूपी में अकेले लड़ने की भी सोच सकती है, क्यूंकि लोकसभा का चुनाव केंद्र में सरकार बनाने के लिए होगा. ऐसे में बीजेपी को रोकने के लिए अल्पसंख्यक और दलितों का एक बड़ा तबका कांग्रेस के पाले में जा सकता है। जहा पहले कांग्रेस को गठबंधन में सीट देने की बात हो रही थी, वहीं अब जीत से उसका मनोबल इतना बढ़ा है कि वह गठबंधन के नेतृत्व की बात कर रही है।

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र दुबे कहते हैं कि भाजपा को रोकने के लिए यूपी में अब महागठबंधन होना उनका कहना था कि जिस तरह से सपा और बसपा ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में समर्थन दिया है उसके बाद अब यूपी में भी लड़ाई साथ ही लड़ी जाएगी. उन्होंने कहा कि मामला सीट बंटवारे को लेकर फंसेगा, लेकिन अब बंटवारा बराबर-बराबर होगा. यानी 80 सीटों में से सपा, बसपा और कांग्रेस 25-25 सीटों पर लड़ सकती हैं तय है।

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