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बीजेपी द्वारा इस सांसद का टिकट काटने पर, सुब्रमण्यम स्वामी ने पार्टी पर जताई हैरानी

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(Image Credits: zeenews)

लोकसभा चुनाव को देखकर भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी में कई उम्मीदवारों का टिकट काटा है। जिसके कारण कुछ लोगो द्वारा तो पार्टी के प्रति विरोध जताया गया। वहीं पार्टी में टिकट काटे जाने पर कुछ नेताओं ने भाजपा से इस्तीफ़ा भी दे दिया। इसी प्रकार भाजपा ने इंदौर से सुमित्रा महाजन का भी टिकट काट दिया है। सुमित्रा महाजन का टिकट काटे जाने पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पार्टी के प्रति अपना विरोध जताया है।

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बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी अपनी पार्टी और विपक्षी दलों पर किए जाने वालो बयानो के लिए जानें जाते है। इसी प्रकार उन्होंने एक बार फिर अपनी ही पार्टी पर सुमित्रा महाजन का टिकट काटने को लेकर सवाल उठाये हैं। बता दे की बीजेपी से वरिष्ठ नेता सुमित्रा महाजन इंदौर से 8 बार सांसद भी रह चुकी है। लेकिन इस चुनाव में पार्टी द्वारा उनका टिकट काट देना कुछ अजीब सा लगता है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने इंदौर से सांसद रह चुकी सुमित्रा महाजन का टिकट काटे जाने पर पार्टी के प्रति हैरानी जताई है। स्वामी ने ट्वीट कर कहा कि सुमित्रा महाजन को टिकट नहीं देने का फैसला हैरानी भरा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा पार्टी की तरफ से पारित पार्टी संविधान में ऐसा कोई नियम नहीं है। जिसमे बताया गया हो कि 75 साल से अधिक साल के लोग चुनाव लड़ने के लिए योग्य नहीं है। स्वामी ने कहा कि जीत की योग्यता और आईक्यू तथा फेनोटाइपिक उम्र, सुमित्रा जी इन तीनों पैमानों पर खरी उतरती हैं।

सुमित्रा महाजन ने इससे पूर्व भाजपा की तरफ से की गई देरी को देखते हुए चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। यह माना जा रहा है की पार्टी ने उनकी उम्र 75 पार होने के कारण टिकट नहीं देने का फैसला कर लिया था। हालांकि, सुमित्रा महाजन नौंवी बार इंदौर से चुनाव लड़ने की तैयारी में थीं। लेकिन महाजन ने 5 अप्रैल को एक पत्र जारी कर खुद के चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की थी। इस पत्र में सुमित्रा महाजन ने लिखा था, ‘भाजपा ने आज तक इंदौर में अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। यह अनिर्णय की स्थिति क्यों है? संभव है कि पार्टी को निर्णय लेने में कुछ संकोच हो रहा है।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘हालांकि, मैंने पार्टी में वरिष्ठों से इस सन्दर्भ में बहुत पहले ही चर्चा की थी, और निर्णय उन्हीं पर छोड़ा था। इसलिए मैं यह घोषणा करती हूं कि मुझे अब लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ना है। अतः पार्टी अपना निर्णय मुक्त मन से करे निःसंकोच होकर करे।’ उन्होंने कहा कि इंदौर के लोगों ने आज तक मुझे जो प्रेम दिया, भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिस लगन से सहयोग दिया और जिन-जिन लोगों ने मुझे सहयोग दिया मैं उन सभी लोगों की हृदय से अभारी हूं।


उन्होंने आगे लिखा अपेक्षा करती हूं कि पार्टी जल्द ही अपना निर्णय करे। ताकि आने वाले दिनों में सभी को काम करने में सुविधा होगी तथा असमंजस की स्थिति समाप्त होगी।

बीजेपी द्वारा अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार करना उचित नहीं है। वो वरिष्ठ नेता जिन्होंने पार्टी का इतने लंबे समय तक साथ दिया है। मौजूदा सरकार द्वारा इस चुनाव में ऐसा कदम उठाना नई बात नहीं है। पिछले दिनों की ही बात है। जब झारखंड के रांची से भाजपा सांसद राम अटल चौधरी का पार्टी ने अधिक उम्र होने के करण उनका टिकट काट दिया था। इसके साथ साथ पार्टी ने 3 और लोगो का भी टिकट काटा था।

अपनी पार्टी द्वारा इस प्रकार के व्यवहार से भाजपा सांसद राम टहल चौधरी ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। साथ ही उन्होंने निर्दलीय लड़ने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है की सांसद राम टहल चौधरी जनसंघ के समय से पार्टी के साथ बने हुए थे। और इसके साथ साथ उन्होंने पांच बार चुनाव में जीत भी हासिल की थी। उन्होंने राज्य की भाजपा नीत रघुवर सरकार पर जनता के कल्याण हेतु कार्य को अनदेखा करने का आरोप लगाया था।

मौजूदा सरकार द्वारा इस प्रकार के फैसले लेने से पता चलता है की, पार्टी चुनाव जीतने के लिए किसी के भी खिलाफ जा सकती है। बीजेपी सरकार चुनाव जीतने के लिए अपनी ही पार्टी के अच्छे नेताओं का टिकट काटने से भी पीछे नहीं हटती है। पार्टी द्वारा वरिष्ठ नेताओ के साथ इस प्रकार के व्यवहार से पता चलता है की बीजेपी सत्ता के गुरुर में किस प्रकार लिप्त हो चुकी है। बीजेपी द्वारा पार्टी के वरिष्ठ नेताओ का टिकट काटकर और उनको अलग थलग करने से एक बात का पता चलता है। की पार्टी यह बिलकुल भी नहीं चाहती की भाजपा में जिन गिने चुने लोगो के पास निर्णय लेने का अधिकार है। वह लोग पार्टी के वरिष्ठ नेताओ द्वारा प्रभावित हो सके।

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