fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
राजनीति

बीजेपी ने UPA सरकार में जिस बड़े फैसले का किया था विरोध, अब वही करने जा रही सरकार

The-big-decision-that-BJP-government-opposed-in-UPA-,now-the-government-is-going-to-do-the same
(image credits: moneycontrol)

केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा अक्सर कांग्रेस पार्टी द्वारा लाई गई नीतियों को विरोध किया गया। अक्सर मौजूदा सरकार में लोग उनके ही कार्यकाल में देश में आने वाले बुरी परिस्स्थितयो के पीछे भी कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराते है। वहीँ अब केंद्र की मोदी सरकार वह कदम लेने जा रही है, जिसका उन्होंने UPA सरकार में पहले विरोध किया था।

Advertisement

दरअसल मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने विदेशी यूनिवर्सिटीज को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की मंजूरी देने की योजना बनायी थी, लेकिन मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद उस योजना को अनदेखा कर दिया। वही अब बीजेपी सरकार ऐसा ही एक बिल लाने जा रही है। जिससे विदेशी यूनिवर्सिटीज इंडिया में अपने ऑपरेशंस चला सकती हैं। इस बिल को ‘हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल’ नाम दिया गया है।

बिल का उद्देश्य देश में एक हायर एजुकेशन रेगुलेटर स्थापित करना है, जो कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) और ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) की जगह लेगा। सुनंने को यह आ रहा है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस कानून का मसौदा बिल मंत्रालयों में विचार विमर्श के लिए भेजा है।

बता दे की इस बिल में ऐसा क्लॉज़ है., जिसके अनुसार नया हायर एजुकेशन कमीशन ‘उच्च गुणवत्ता और प्रसिद्ध विदेशी यूनिवर्सिटीज’ को भारत में अपना कैंपस स्थापित करने की मंजूरी दी जाएगी। मालूम हो की जब यूपीए-2 सरकार ने ऐसा ही फॉरेन एजुकेशनल इंस्टीट्यूट बिल लाने का प्रयास किया था, तब भाजपा ने इसका विरोध किया था।

आपको बता दे की वर्तमान सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान नीति आयोग और वाणिज्य मंत्रालय के साथ मिलकर यूपीए के फॉरेन एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स बिल को पुनर्जीवित करने के कई कोशिशे की। इसकी शुरुआत अप्रैल, 2015 से हुई, जब वाणिज्य मंत्रालय ने एक रणनीतिक पत्र विदेश मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और नीति आयोग के साथ साझा किया।


इस पत्र में विदेशी मुद्रा पाने और “भारत में शिक्षा” ब्रांड को स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय शिक्षा के अन्तरराष्ट्रीयकरण की बात कही गई थी। यूपीए सरकार के फॉरेन एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बिल को पुनर्जीवित करना वाणिज्य मंत्रालय के चार एक्शन प्वाइंट में से एक है। जून, 2015 में इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने शीर्ष अधिकारियों से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने नीति आयोग से इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा। भारतीय शिक्षा का अन्तरराष्ट्रीयकरण, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के ‘एजुकेशन क्वालिटी अपग्रेडेशन एंड इंक्लूजन प्रोग्राम’ (EQUIP) का हिस्सा है।

मौजूदा सरकार द्वारा उठाये गए इस कदम लगता है की उनकी कथनी और करनी दोनों ही बातें अलग है। किसी पार्टी द्वारा देशहित में लिए गए फैसले का पहले विरोध करना फिर सत्ता में आने के बाद उसी फैसले को लागु कर देना हैरान करने वाला लगता है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved