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त्रिपुरा: बीजेपी सरकार पर सहयोगी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मारपीट का आरोप, सहयोगी पार्टी ने दी धमकी

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(image credits: the indian express)

लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद से ही बीजेपी और उसकी सहयोगी दलों के बीच में तकरार देखा जा रहा है। अभी कुछ ही दिनों पहले NDA सरकार में सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड JDU प्रमुख नीतीश कुमार ने बीजेपी द्वारा लाये जाने वाले तीन तलाक बिल का विरोध किया था। इतना ही नहीं JDU ने दिल्ली में आने वाले चुनाव में बीजेपी के साथ देने के बजाय, स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का भी फैसला लिया है।

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इसी प्रकार अब नार्थ ईस्ट से असम सरकार में गठबंधन सहयोगी पार्टियों के बीच झड़प की खबरें सामने आ रही है। इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) ने भारतीय जनता पार्टी पर इस झड़प को लेकर गंभीर आरोप लगाएं है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी उसके कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न कर रही है। इसको लेकर (IPFT) ने बीजेपी को चेताया है की अगर उनके कार्यकर्ताओं के साथ उत्पीड़न नहीं रुका तो वह ‘दूसरे विकल्पों’ पर विचार कर सकती है।

इस मामले में IPFT के प्रवक्ता मंगल देबबर्मा ने सोमवार शाम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘हालिया लोकसभा चुनावों के बाद से बीजेपी के लोग IPFT समर्थकों को लगातार निशाना बना रहे हैं। हम काफी भय में हैं और हमारे सहयोगियों द्वारा लगातार हमारा उत्पीड़न किया जा रहा है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार में सहयोगी होने के बावजूद हमें धमकियों और इस प्रकार की घटनाओ का सामना करना पड़ रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए।

IPFT प्रवक्ता ने गठबंधन से अलग होने का रास्ता अपनाते हुए अप्रत्यक्ष रूप से इशारा करते हुए कहा, अगर उनके साथ होने वाली घटनाये नहीं रुकी तो वह दूसरा विकल्प विचार करेगी। जब उनसे पुछा गया क्या उनकी पार्टी बीजेपी से अलग हो जाएगी, तो उन्होंने कहा की, वह इसपर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

IPFT प्रवक्ता देबशर्मा का दावा है की, लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से हुई घटनाओ में उनके पार्टी के 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को नुकसान पंहुचा। उनके अनुसार गठबंधन सहयोगी पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा के सबसे ज्यादा मामले त्रिपुरा के जोलाईबाड़ी सब डिविजन, पश्चिमी त्रिपुरा के जाम्पुईजाला सब डिविजन और नॉर्थ त्रिपुरा के सदर सब डिविजन के अलावा खोवाई और धालाई जिलों में देखी गई।


प्रवक्ता ने कहा, ‘अभी तक IPFT ही ऐसी पार्टी है जिसका त्रिपुरा में कोई अस्तित्व है। बीजेपी अपना खुद का सपोर्ट बेस बनाने की कोशिश कर रही है। उन्हें लगता है कि अब उन्हें IPFT की जरूरत नहीं है।’ देबशर्मा ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ होने वाले बर्ताव के पीछे इन्ही कारणों को जिम्मेदार ठहराया।

वहीं बीजेपी प्रवक्ता अशोक सिन्हा ने इन सभी आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि, IPFT गठबंधन से अलग होने की धमकियां देकर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा भारतीय जनता पार्टी इस प्रकार की राजनीति में भरोसा नहीं करती है। और इसके साथ ही बीजेपी नेता ने IPFT कार्यकर्ताओं के साथ हुए बर्ताव के पीछे राजनीतिक लड़ाइयों को बताया है।

असम बीजेपी द्वारा अपने सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं साथ इस प्रकार का व्यवहार बिलकुल भी उचित नहीं है। मौजूदा सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए की इस चुनाव में मिलने वाले इतने बड़े बहुमत के पीछे सहयोगी पार्टियों का भी बराबर योगदान है। बीजेपी द्वारा सहयोगी पार्टियों के साथ ऐसे बर्ताव से यह प्रतीत होता है की, जैसे पार्टी को चुनाव में इतना बड़ा बहुमत हासिल करने के बाद,उन्हें सहयोगी दलों के योगदान की कोई चिंता ही नहीं है। बीजेपी के इस प्रकार के रवैये से, सत्ता को लेकर उनके अहंकार का पता चलता है।

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