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बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को लेकर उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान

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(Image Credits: The Asian Age)

अक्सर महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के बीच एक दूसरे से टकराव की बाते सामने आती रहती है। दोनों पार्टियों द्वारा कभी कभी किसी मुद्दे पर सहमति न होने पर एक दूसरे पर बयानबाजी करते हुए भी सुना जा सकता है। इसी प्रकार एक बार फिर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है।

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दरअसल महाराष्ट्र के अमरावती में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं की एक संयुक्त बैठक में कहा कि अगर छत्रपति शिवाजी महाराज आज होते और उनके सामने हमने गठबंधन में धोखाधड़ी की होती तो हमें पहाड़ की चोटी से फेंक दिया जाता। ठाकरे ने यह बयान मोदी सरकार के कार्यकाल में उनकी पार्टी के साथ हुई टकरार की तरफ इशारा करते हुए दिया। हालाकिं दोनों पार्टियों ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट किया कि साढ़े चार साल में हुईं आपसी गलतफहमियां दूर हो गई हैं। और अब हमारा फोकस आने वाले लोकसभा चुनाव जीतने पर ही होना चाहिए। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे।

ठाकरे ने अपने भाषण में कहा, ‘मुझे बात कैसे और कहां से शुरू करनी है, इसे लेकर असहजता महसूस हो रही थी। इस असहजता की वजह बीजेपी और शिवसेना के रिश्तों में आए उतार-चढ़ाव हैं। पिछले पांच सालों में दोनों पक्षों की तरफ से विरोधी बयान दिए गए। उन्होंने आगे कहा, लेकिन अब सही समय है जब हमें मतभेद भुलाकर साथ आना चाहिए। लेकिन इसका विकास पर असर नहीं पड़ा। हमने जो भी कहा सब सार्वजनिक है। पिछले 25 सालों से दोनों पार्टियां साथ रही हैं। हम हिंदुत्व को बचाने के लिए एक बार फिर साथ आए हैं।’

आपको यह भी बता दें की दोनों पार्टियां भले ही जनता के सामने कुछ भी दिखाने को कोशिश कर रही हो। लेकिन सच्चाई तो यह है की भाजपा अपने लाभ के लिए अपने गठबंधन को भी दरकिनार कर देती है। दूसरी और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी हाल में कथित रूप से प्रधानमंत्री मोदी खिलाफ नारा लगाते हुए कहा था, ‘चौकीदार ही चोर है।’

दोनों पार्टियों के इस संयुक्त सम्मेलन में विदर्भ के पांच जिलों से सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। 48 लोकसभा सीटों वाला महाराष्ट्र देश का दूसरा महत्वपूर्ण सियासी सूबे की तरह माना जाता है। जहां से इस बार बीजेपी 25 और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। दोनों पार्टियों के बीच सीटों के इस प्रकार बटवारें के बाद सीट न मिलने पर आरपीआई के रामदास अठावले ने सीट न मिलने से नाराजगी जताई थी।


उद्धव ठाकरे ने छत्रपति शिवाजी की मिसाल देते हुए कहा हम हिंदुत्व की रक्षा करने के लिए साथ आएं हैं। और कहा की हमे साथ में मिलकर काम करना होगा। सिर्फ छत्रपति शिवाजी महाराज की जय बोलने से और भगवा झंडा हाथ में लेकर नारेबाजी करने से दोनों पक्षों में गठबंधन नहीं होगा। बीजेपी की तरफ इशारा करते हुए कहा छत्रपति शिवाजी का उदहारण देते हुए बताया कि, अगर छत्रपति शिवाजी महाराज ने सामने तारीफ करना और पीठ पीछे कड़वाहट की बात देखी होती तो उन्होंने हम सभी को पहाड़ी से धकेल देने की शिक्षा दे दी होती।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा बीजेपी पर छत्रपति शिवाजी का प्रयोग करते हुए उदाहरण देने से, बीजेपी के दोहरे चरित्र का पता चलता है। जिससे यह साफ हो जाता है की, भाजपा किस तरह महाराष्ट की जनता के सामने अपने गठबंधन को लेकर अपना एक अलग चेहरा सामने रखती है। परन्तु पीठ पीछे सरकार इसको लेकर एक दूसरा ही रवैया रखती है। इसी कारन बीते सालो में अक्सर मौजूदा सरकार और महाराष्ट्र में शिवसेना के बीच उतार चढ़ाव को देखा गया।

उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर राज्य में किसानो की हालत और किसी न किसी मुद्दे को लेकर पहले भी निशाना साधा हैं। एक साल पहली की ही बात है
जब शिवसेना प्रमुख ने बीजेपी की रैली में जमकर निशाना साधा था। और साथ में यह दावा करते हुए कहा था कि, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को अब ‘किसी भी राजनीतिक गठबंधन की जरूरत नहीं’ है। उन्होंने आगे कहा, ‘जब अटल जी (अटल बिहारी वाजपेयी) की सरकार केंद्र में थी तो उन्हें कई राजनीतिक मित्रों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन मौजूदा सरकार को किसी भी राजनीतिक गठबंधन की जरूरत नहीं है.’

इतना ही नहीं उद्धव ठाकरे ने जनता से किये गए वादों को लेकर झूठ फैलाने पर भी पार्टी पर आरोप लगाए थे। और कहा था पार्टी सिर्फ चुनावी फायदे की खातिर ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा उठाती है। शिवसेना प्रमुख ने पार्टी पर राज्य में किसानो के कर्जमाफी और उनकी खस्ता हालत को लेकर भी आरोप लगाए थे। इसके साथ अक्सर भारतीय सेना के हितो की बात करने वाली सरकार पर जवानो के वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव ठुकरा देने पर भी उद्धव ठाकरे ने निशाना साधा था।

इन सभी बातों से यह तो पता चलता है की बीजेपी एक तरफ जनता से किये गए वादों पर तो विफल शाबित हुई ही है। वहीँ साथ साथ अपने गठबंधन से किये गए वादों से भी पीछे हटती दिखती है। लेकिन अब लोकसभा चुनाव अब करीब है और दोनों ही पार्टियां ये नहीं चाहेगी की दोनों के बीच मनमुटाव हो। पार्टिया यह दिखाने की कोशिस करेंगी की दोनों ने देश की जनता की सेवा के लिए आपसी टकराव को एक तरफ अलग कर दिया है।

कहा जा रहा है की आने वाले चुनाव में शिवसेना हिंदुत्व के हितो की रक्षा के लिए भाजपा के साथ चुनाव में उतरेगी। शिवसेना और भाजपा द्वारा सिर्फ हिंदुत्व के हितो के लिए बात करने से यह पता चलता है की, दोनों ही पार्टियां केवल एक ही विचारधारा को तवज्जों देती है।

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