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उत्तरप्रदेश : मतदान से एक दिन पहले बीजेपी के लोगो पर वोटर्स के उंगलियों पर जबरन स्याही लगाने का आरोप

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(Image Credits: News Nation)

लोकसभा चुनाव अब समाप्त हो गए है, इसके साथ साथ मीडिया में कई चैनलों ने एग्जिट पोल को भी लोगो के सामने रख दिया है। देश भर में चुनाव हुए कुछ कुछ जगहों पर चुनाव के दौरान भिन्न भिन्न बाते सुनने को मिली, कभी कुछ जगहों पर EVM में खराबी को देखा गया तो कहीं बूथ कैप्चरिंग जैसे मामले सामने आये। लेकिन यह सारी घटनाये मतदान वाले दिन हुई, वहीं कुछ जगह मतदान के एक दिन पहले ही लोगो के उँगलियों में जबरन स्याही लगाने का भी मामला सामने आया। हम बात करने जा रहे है उत्तर प्रदेश के चंदौली संसदीय क्षेत्र की।

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मामला उत्तर प्रदेश में 19 मई को आखिरी यानी सातवें चरण के मतदान का है। संसदीय सीट चंदौली में पड़ने वाले तारा जीवनपुर गांव के लोगों का कहना है कि मतदान से एक दिन पहले उनकी उंगलियों पर जबरन स्याही लगाई गई। इसके साथ ही उन्हें इसके लिए 500 रुपये दिए गए। उन्होंने बताया की ऐसा करने वाले उनके ही गांव के तीन लोग थे। गाँवालो ने कहा, ‘वे लोग भाजपा के थे. उन्होंने हमसे पूछा कि क्या हम पार्टी के लिए वोट डालेंगे. उन्होंने हमें कहा कि अब आप वोट नहीं डाल सकते. किसी को बताना नहीं.’

बीजेपी द्वारा इस प्रकार की हरकत करना बेहद ही गलत है। ऐसा करके उन्होंने गांव के आम लोगो को उनके मतधिकार से वंचित रखने की कोशिश की है। इसके साथ ही उन्होंने गाँवालो को उनके पसंद का उम्मीदवार का चुनाव करने से भी रोका।

इस मामले में चंदौली के एसडीएम कुमार हर्ष ने कहा, ‘शिकायतकर्ता अभी पुलिस थाने में हैं. वे लोग जो शिकायत दर्ज कराते हैं, उसके मुताबिक हम लोग कार्रवाई करेंगे. वे अभी भी वोट डालने के योग्य हैं क्योंकि चुनाव तब शुरू नहीं हुए थे। उन्हें अपनी एफआईआर में लिखवाना होगा कि उनके उंगलियों पर जबरन स्याही लगाई गई है.’

न्यूज एजेंसी ने इन मतदाताओं की उंगुलियों पर लगी स्याही वाली तस्वीरें जारी की हैं। इन लोगों ने अपने हाथ में उन्हें कथित तौर पर दिए गए नोटों पकड़ रखे हैं और उनकी उंगलियों पर स्याही लगी हुई है।


बता दें, लोकसभा चुनाव (2019 Indian General Elections) के सातवें और अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की 13 सीटों पर रविवार को हुए मतदान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई दिग्गजों का सियासी भविष्य तय होगा। इस चरण में वाराणसी के अलावा गाजीपुर, मिर्जापुर, महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, चंदौली और रॉबट्र्सगंज सीटों के लिये मतदान हुए। इस चरण में कुल 167 प्रत्याशी मैदान में हैं।

आखिरी चरण में प्रधानमंत्री मोदी के आलावा केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा (गाजीपुर), अनुप्रिया पटेल (मिर्जापुर), प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय (चंदौली), पूर्व केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री आर.पी.एन. सिंह (कुशीनगर) जैसी सियासी हस्तियों का भाग्य तय होगा।

उत्तर प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन के बाद सबकी निगाहें प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय निर्वाचन और उम्मीदवारी वाले क्षेत्र बनारस पर लगी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में चली लहर के कारण, केन्द्र में मोदी ने करीब तीन लाख 72 हजार मतों से इस सीट पर जीत हासिल की थी। इस चुनाव में भी उनकी जीत सुनिश्चित मान रही बीजेपी के सामने मोदी को पिछली दफा के मुकाबले अधिक मतों से जिताने की चुनौती है। भाजपा ने गोरखपुर सीट पर भोजपुरी अभिनेता रवि किशन को मैदान में उतारा है, वहीं इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

बता दे की योगी आदित्यनाथ यहाँ से पांच बार सांसद रह चुके है। हालांकि पिछले साल इस सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को सपा के हाथों हार का मुँह देखना पड़ा था। इसी कारण इस बार यह सीट जीतना भाजपा के लिये प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से दोबारा संसद पहुंचने की उम्मीद लगाये हुए हैं। ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका निर्णय तो 23 मई को ही हो पाएगा। सातवें चरण में भाजपा 11 सीटों पर जबकि उसका सहयोगी अपना दल—सोनेलाल मिर्जापुर और रॉबर्ट्रसगंज सीटों पर चुनाव लड़ रहा है।

पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की लहर के कारण सातवें चरण की सभी 13 सीटों पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने ही जीत दर्ज की थी। इस चरण का मतदान महागठबंधन कर चुनाव लड़ रहे सपा के आठ और बसपा के पांच प्रत्याशियों के भाग्य का भी फैसला करेगा।

मतदान के एक दिन पहले ही लोगो के हाथों में जबरन स्याही लगाकर, बीजेपी ने यह शाबित कर दिया है की, वह चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकती है। अक्सर बीजेपी दूसरी पार्टियों पर यह आरोप लगाती है की, कुछ पार्टियों द्वारा मतदान के दौरान लोगो को उनकी पार्टी को वोट देने के लिए प्रभावित किया जा रहा है।

लेकिन अगर देखा जाये तो इस चुनाव में बीजेपी के तरफ से भी इस प्रकार के मामले सामने आए है। कभी बीजेपी पर कांग्रेस द्वारा बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगे तो कभी उनके पार्टी के पोलिंग एजेंट आम नागरिक को बीजेपी पर जबरन वोट डालने के लिए मजबूर करते हुए देखे गए, तो किसी किसी मामलो में तो उनके नेता किसी कुख्यात गैंस्टर के साथ भी देखे गए।

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