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उत्तर प्रदेश सरकार का सबसे बड़ा घोटाला आया सामने, मंत्री और अधिकारी भी शामिल

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(image credits: new indian Express)

केंद्र में बैठी नरेंद्र मोदी की सरकार किसानो के मुद्दों को लेकर बड़े बड़े वादे करती आई है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों भले ही किसानों की मदद के लिए तमाम जतन कर रही हों, लेकिन अधिकारी अपने पुराने ढर्रे पर कायम दिख रहे हैं।

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मामला उत्तर प्रदेश का है। यहां गरीब किसानों को बांटने के लिए कई क्विंटल बीज खरीद कर उनको मुहैया करवाई गई है, लेकिन जांच में पता चला कि असल में यह खरीद व आपूर्ति महज कागजों में हुई है। बड़े पैमाने पर बीजो खरीद में अधिकारियो ने धांधली करी उन्हें सरकार का बिलकुल भी खौफ नहीं है उन्हें यह साफ़ पता है की कोई आधिकारिक करवाई नहीं होगी जिसके कारण ही बड़े पैमाने पर किसानो के साथ धोखा-धरी की जाती है।

गरीब किसानो को मुहैया करवाए जाने वाले बीज किसानो तक पहुचे ही नहीं। आपको बता दे की धोखाधड़ी के इस मामले में बीज खरीद की फर्जी रसीदों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर व सरकार की मुहर का स्पष्ट तौर पर इस्तेमाल किया गया था।

अब तक 16.56 करोड़ रुपये की फर्जी रसीदों का पता चला है। यह इस बड़े घोटाले का अंश मात्र है। यह घोटाले पहले से ही होते आ रहे है पर किसी भी सरकार ने इसपर कोई करवाई नहीं करी।

मामले को बढ़ता देख अब और सरकारी धन के इस दुरुपयोग के संबंध में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा को यह पता लगाने का निर्देश दिया है और जाँच का आश्वाशन दिया है।


कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उमाशंकर पाठक ने कहा कि कानपुर पुलिस ने उत्तर बीज एवं विकास निगम की जांच के आधार पर पहले ही प्राथमिकी दर्ज की है. यह घोटाला पिछले साल तब उजागर हुआ जब बीज निगम ने भुगतान के लिए अपना बिल कृषि विभाग के पास भेजा. जांच के दौरान 99 लाख रुपये का एक फर्जी बिल पाया गया. बाद में घोटाले की विभागीय जांच शुरू की गई। सूत्रों ने बताया कि अभी तक 16.16 करोड़ रुपये के बिल फर्जी पाए गए।

एक अधिकारी ने बताया, “हम मामले में किसी मंत्री या बड़े अधिकारियो की इसमें हिस्सेदारी से हम इनकार नहीं कर सकते हैं। ऐसा लगता है कि शीर्ष स्तर पर मिलीभगत थी”. सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान पाया गया कि 9080 और 7188 दो सीरीज की संख्या वाली रसीद फर्जी थीं। यह जांच कानपुर स्थित गोदाम पर केंद्रित थी। उन्होंने बताया कि प्रमुख अधिकारियों और भंडार के निचले स्तर के कर्मचारियों ने सिर्फ कागजों पर बीजों की खरीद और आपूर्ति दिखाई, बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने बिलों को अग्रसारित किया और भुगतान किया गया।

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