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गुजरात में वोटरों ने मोदी और कांग्रेस को दी धमकी, धर्म के नाम पर नहीं काम से वोट मांगे

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चुनाव शुरू हो चुके है और सभी पार्टियां इसी उम्मीद में है की उन्हें ज्यादा वोट मिलेंगे। नेताओ के झूठे भाषणो और भड़काऊं बयान से माहौल गरमाया हुआ है। परन्तु इस गरमाये माहौल में देश की जनता ठन्डे दिमाग से काम ले रही है। जैसे जैस अधिकतर पार्टियां कामो को छोड़ के जातिवाद और धर्मो की ओर रुख करते  जा रहे है वही वोटरों को समझ आ गया है की उन पार्टियों का साथ नहीं देना जो धर्म के नाम पर वोट मांगते है। वोटरों ने साफ़ साफ़ हिदायत दी है की वह काम के जरिये वोट हासिल करे ना की भड़काऊं बयान दे कर। 

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ऐसे ही गुजरात में वोटरों ने पार्टियों को गुस्सा दिखाते हुए बता दिया है की इस बार संभल कर रहे। गुजरात के जूनागढ़ में वोटरों में कांग्रेस के साथ ही भाजपा को लेकर भी नाराजगी है। जूनागढ़ सीट को लेकर भाजपा भी काफी चिंतित है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार यह उन महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है जहां भाजपा को काफी मेहनत करनी पड़ रही है। स्थानीय निवासी 60 वर्षीय ऑटो ड्राइवर हुसैन अंसारी ने सीधा सीधा मोदी को तंज कसा है और कहा है कि यदि भारतीय जनता पार्टी को यहां जीतना है तो उन्हें भावनाएं भड़काने से कही अधिक काफी कुछ करने की जरूरत है।


जूनागढ़ को अक्सर ऐसे क्षेत्र के रूप में बताया जाता है जो स्वतंत्रता के दौरान पाकिस्तान में मिलने की कगार पर था।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 10 अप्रैल के भाषण का जिक्र करने पर अंसारी ने कहा, ‘वोटरों को बरगलाने के लिए सब लोग कहते हैं कि जूनागढ़ वह क्षेत्र है जो आजादी के समय पाकिस्तान में मिलने वाला था। कई साल पहले जूनागढ़ के लोगों ने भारत के साथ रहने का फैसला किया था।इसके बाद लोग क्यों नवाब की भूमिका की चर्चा करते हैं। ‘ पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि जूनागढ़ के भारत के साथ रहने में पटेल की भूमिका को कौन भूल सकता है। पीएम ने कहा था कि यदि सरदार पटेल नहीं होते तो जूनागढ़ कहा होता?


अंसारी का कहना था की, ‘आज जूनागढ़ नगर निगम 2014 से भाजपा के अंतर्गत ही है और आप देख है इसकी हालत कितनी बुरी है।’ अंसारी सिर्फ अकेले ही नहीं है। एक अन्य ड्राइवर कनू सोलंकी ने कहा, ‘यहां भाजपा और कांग्रेस में कड़ा मुकाबला है। दोनों ही दलों ने अपने किए गए वादों को पूरा नहीं किया है।’ साल 2017 में कांग्रेस को वोट देने वाले तलाला के आम किसान महेश पटेल कहते हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग किसको वोट देते हैं लेकिन नेता अपने वादों को भूल जा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा में क्या अंतर है।


वोटरों में पार्टियों को लेकर खासा गुस्सा है। आम जनता अब  समझती है की भाजपा और कांग्रेस  दोनों ही धर्मो को लेकर भाषण देते है परन्तु जनता के हित में कोई काम नहीं करते। इनके वादे सिर्फ नाम के है। जनता से पूछे जाने पर यही जवाब सामने आया है की इस बार जनता सीसरफ धर्म और मंदिर के नाम पर नहीं काम के जरिये वोट देंगे। 


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